विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना दोहरे उद्देश्य के साथ की गई थी. हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार करना, तथा समाज को सुलभ और किफ़ायती आधारभूत सुविधाओं के माध्यम से सेवा प्रदान करना.
शुरुवात: हिंदी साहित्य के संवर्धन के लिए समर्पित एक साहित्यिक संस्था के रूप में प्रारंभ हुआ यह प्रयास, शीघ्र ही समाज की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को पहचान सका, ऐसे गुणवत्तापूर्ण आयोजन स्थल, जो परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न डाले. ऐसे समय में, जब शहर में व्यावसायिक स्थलों की लागत लगातार बढ़ रही थी, हमने समाज सेवा का यह अवसर देखा.
सामाजिक हेतु: वर्षों के सतत प्रयासों के फलस्वरूप, हमने छह विशिष्ट हॉल्स का विकास किया, जो विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं – 44 लोगों की अंतरंग सभाओं से लेकर 500 लोगों की भव्य सभाओं तक. हर हॉल का निर्माण एक ही सिद्धांत पर किया गया है: गरिमा, गुणवत्ता और किफ़ायत.
विस्तार: यद्यपि हमारी जड़ें हिंदी साहित्य और सांस्कृतिक संरक्षण में निहित हैं, लेकिन समय के साथ हमारी सेवा-परिधि पूरे समाज तक विस्तारित हो गई है. आज हमारे यहाँ आयोजित होते हैं:
- हिंदी साहित्य को जीवंत बनाए रखने वाले साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
- जीवनभर की यादें रचने वाले पारिवारिक समारोह
- ज्ञानवर्धन करने वाले शैक्षणिक कार्यक्रम
- व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने वाले कॉर्पोरेट आयोजन
- सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाले सामुदायिक मिलन
इन सभी प्रयासों के माध्यम से, हम अपने मूल सिद्धांत पर अडिग हैं – लाभ से ऊपर सेवा, और व्यापार से ऊपर समुदाय.